कार्बन एवं उसके यौगिक

कार्बन एवं उसके यौगिक

 

  • बर्जीलियस (वर्ष 1815) की धारणा थी कार्बनिक यौगिकों का निर्माण केवल जीवधारी स्त्रोतों से ही सम्भव है तथा इनका कृत्रिम विधियों द्वारा Laboratory में संश्लेषण सम्भव नहीं है। इसे जैव शक्ति सिद्धान्त कहा गया।
  • रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत कार्बन (Carbon) तथा उनके यौगिकों (जैसे- Co2) का अध्ययन किया जाता है। उसे कार्बनिक रसायन कहते हैं।
  • लेकिन 1828 ई. में ह्वोलर (wohler) ने अकार्बनिक पदार्थों, अमोनियम सल्फेट व पोटेशियम साइनेट को गर्म करके प्रयोगशाला में प्रथम कार्बनिक यौगिक यूरिया प्राप्त किया।
  • दैनिक जीवन में अनाज, टेबल, कुर्सी, पेट्रोल, रसोई गैस, कागज, प्लास्टिक, कपड़े, तेल, साबुन, अपमार्जक, पेंसिल, रबर आदि पदार्थों में कार्बन तत्त्व पाया जाता है।

कार्बन परमाणु की विशेषताएँ :-

1. आवर्त सारणी में कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है।

2. कार्बन परमाणु का प्रतीक C है तथा कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1S2 2S2 2p2 होता है।

3. कार्बन परमाणु की संयोजकता (Valency) 4  होती है एवं अपनी Valency को संतुष्ट करने के लिए

     निम्नानुसार संयोग करके अणु बना सकता है।

  1. चार एकल संयोगी परमाणु से :- जैसे-  CH4, CCl4

 

H

 

 

 

 

 

Cl

 

H—

C

—H

 

 

 

Cl—

  C

—Cl

 

H

 

 

 

 

 

Cl

 

Methane (मेथेन) [CH4]

 

 

 

Carbon Tetra Chloryde [CCl4]

(ii) दो एकल संयोगी तथा एक द्वि-संयोगी परमाणु से:- जैसे – फार्मेल्डिहाइड

                                H

                                               C = O                 

                                H    

फार्मेल्डिहाइड [CH2O]

(iii) एक एकल संयोगी एवं एक त्रिसंयोगी परमाणु से :— जैसे- हाइड्रोजन सायनाइड

                                H—C = N

                                (हाइड्रोजन सायनाइड)

(iv) दो द्वि संयाजी परमाणु से:- जैसे- कार्बन डाई ऑक्साइड

                                O = C = O

                                (कार्बन डाई ऑक्साइड) [Co2]

4. कार्बन की ज्यामिति- कार्बन की ज्यामिति समचतुष्फलक होती है।

समचतुष्फलक:- ऐसा चतुष्फलक जिसमें चार त्रिभुजाकार फलक उपस्थित हो, उसमें एक को आधार मानते हुए इसके तीन कोनों को एक शीर्ष पर मिला दिया जाऐ तो अन्य तीन त्रिभुजाकार फलक बन जाए। इस सम्पूर्ण त्रिविम ज्यामिति को समचतुष्फलक कहते हैं।

 

 

 

 

 

उदाहरण – CH4

 

                                        

बंध कोण :-

  • दो निकटवर्ती बंधो के मध्य कोण को बंध कोण कहते है।
  • कार्बन – कार्बन के मध्य बंध कोण 109028l होता है।

5. कार्बन परमाणु में एक विशेष गुण पाया जाता है कि कार्बन – कार्बन से जुड़कर शाखित, अशाखित एवं चक्रिय यौगिकों का

 निर्माण कर सकता है, इस गुण को शृंखलन कहते है।

उदाहरण :-               i. ब्यूटेन (अशाखित शृंखला)

                                ii. आइसोब्यूटेन (शाखित शृंखला)

6.  कार्बन परमाणु कार्बन कार्बन परमाणु से जुड़कर एकल बंध, द्वि बंध, त्रि बंध बना सकता है।

7. कार्बन परमाणु की विद्युत ऋणता हाइड्रोजन परमाणु के लगभग समान होने के कारण यह Hydrogen परमाणु के साथ इलेक्ट्रॉन की बराबर साझेदारी द्वारा सहसंहयोजक बंध का निर्माण कर हाइड्रोकार्बन बनाता है।

अपररूप (Allotropes):- किसी तत्त्व के दो या दो से अधिक रूप जो गुणधर्मों में एक-दूसरे से पर्याप्त भिन्न होते हैं अपररूप कहलाते है।

कार्बन के अपररूप :-

  1. क्रिस्टलीय अपररूप :-  वह अपररूप जिसमें कार्बन परमाणु एक निश्चित व्यवस्था में रहते हुए एक निश्चित ज्यामिति से निश्चित बंधकोण का निर्माण करते हैं क्रिस्टलीय अपररूप कहलाते है।

  उदाहरण – हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन                 

  1. अक्रिस्टलीय अपररूप :-  वह अपररूप जिसमें कार्बन परमाणु की कोई निश्चित व्यव्स्था न होते हुए निश्चित ज्यामिति व निश्चित बंध कोण का निर्माण नहीं होता है उसे अक्रिस्टलीय अपररूप कहते है।

  उदाहरण – कोल, कोक, काष्ठ चारकोल, काजल, गैस कार्बन।

हीरा :-

  • हीरे में कार्बन प्रत्येक कार्बन परमाणु कार्बन के चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंधित होकर एक दृढ़ त्रिआयामी चतुष्फलीय संरचना बनाता है।
  • हीरा कार्बन का अतिशुद्ध रूप होता है।

इसमें कार्बन – कार्बन के मध्य बंध दूरी 1.54Å होती है।

  • हीरा विद्युत का कुचालक होता है क्योंकि कार्बन की चारों संयोजकताएँ 4 अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ी होती है अत: मुक्त इलेक्ट्रान नहीं होते है।
  • हीरा अत्यधिक कठोर होता है क्योंकि इसमें प्रबल सहसंयोजक बंधो का त्रिविम जाल होता है।
  • हीरे का गलनांक 3843k होता है तथा हीरा पारदर्शी होता है।
  • शुद्ध कार्बन को अत्यधिक उच्च दाब एवं ताप पर उपचारित करके हीरे को संश्लेषित किया जा सकता है।

हीरे के उपयोग:-

(i) काँच को काटने में कटर के रूप में

(ii) चट्‌टानों एवं पत्थर काटने की मशीन में

(iii) फोनोग्राम की सुई बनाने में

(iv) रत्नों, आभूषणों के निर्माण में 

                                                                                                       

ग्रेफाइट:-

     – ग्रेफाइड शब्द ग्रेफो (Grapho) से बना है जिसका अर्थ है – लिखना

     – लिखने वाली पेन्सिल में ग्रेफाइट पाया जाता है।

–  इसमें कार्बन का प्रत्येक परमाणु कार्बन के तीन अन्य परमाणुओं के साथ एक ही तल में बंध बनाते हुए

   षट्कोणीय परतीय सरंचना बनाते हैं।

– ग्रेफाइट को शुष्क स्नेहक के रूप में उपयोग करते हैं।

– ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है क्योंकि इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते है एवं दो परतों के मध्य

   स्थान होता है।

– ग्रेफाइट चिकना, चमकीला तथा फिसलनशील पदार्थ होता है।

– ग्रेफाइट काले धूसर रंग का मुलायम पदार्थ होता है।

ग्रेफाइट के उपयोग :-

  1. पेन्सिल में ग्रेफाइट प्रयुक्त होता है।
  2. शुष्क स्नेहक के रूप में
  3. इलेक्ट्रॉड बनाने में
  4. लोहे की वस्तुओं पर पॉलिश करने में
  5. नाभिकीय परमाणु भट्‌टी में मंदक के रूप में।

        फुलरीन:-

– America के प्रसिद्ध वास्तुकार बकमिन्सटर फूलर के नाम पर इनका नाम फुलरीन रखा गया।

– C60 सर्वाधिक स्थायी फुलरीन है जिसे बकमिन्सटर फुलरीन भी कहते हैं।

– यह विद्युत का कुचालक होता है तथा इसमें कार्बन – कार्बन की बंध लम्बाई 1.40Å होती है।

– C60 (फुलरीन) की संरचना Footboll की तरह होती है उसे बकीबॉल भी कहते हैं।

फुलरीन के उपयोग:-

  1. प्राकृतिक गैस के शुद्धीकरण में
  2. आण्विक बैयरिंग में
  3. उच्चताप पर अतिचालक होने के कारण तकनीकी रूप से यह कार्बन का महत्त्वपूर्ण अपररूप है।                                                     ्                  

फुलरीन की सरचंना

Difference between Diamand and Graphitc

हीरा

ग्रेफाइट

  1. हीरे की सरचंना चतुष्फलकीय होती है।

ग्रेफाइट की षट्कोणीय तथा परतों में व्यवस्थित होती है।

  1. हीरा रंगहीन व पारदर्शी होता है।

ग्रेफाइट चमकदार अपारदर्शी व काले रंग का होता है।

  1. हीरा सर्वाधिक कठोर होता है।

ग्रेफाइट मुलायम तथा चिकना होता है।

  1. इनका विशिष्ट घनत्व 3.5 होता है।

इनका विशिष्ट घनत्व 2.25 होता है।

  1. यह विद्युत का कुचालक होता है।

यह विद्युत का सुचालक होता है।

 

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