Complete Notes Sciencce Technology

I – जैव प्रौद्योगिकी

•  वैज्ञानिक पॉलबर्ग को जैव प्रौद्योगिकी का जनक माना जाता है।

•  जैव प्रौद्योगिकी तकनीक द्वारा जीव जन्तुओं, सूक्ष्मजीवों की सहायता से मानव उपयोगी उत्पादों का निर्माण संभव है।

•  परम्परागत जैव प्रौद्योगिकी में जीवों की सहायता से खाने की वस्तुओं तथा दवाओं का निर्माण किया जाता है।

  जैसे – शराब निर्माण, ब्रेड निर्माण

•  आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में मानव उपयोगी गुणों वाले ट्रांसजेनिक जंतुओं व फसलों का निर्माण किया जाता है।

आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी :-

(i)  प्रतिबंधित एन्जाइम्स (रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज) :-

•  इसे आण्विक केंचियाँ अथवा जैविक चाकू भी कहा जाता है।

•  इस एन्जाइम्स की खोज स्मिथ, नाथम तथा आरबर ने वर्ष 1970 में की थी।

•  ये एन्जाइम्स डबल स्टेण्टेड DNA को विशिष्ट स्थल से काटते हैं।

(ii) प्लाज्मिड :- प्लाज्मिड की खोज लेडर बर्ग तथा विलियम हेस ने की थी।

•  PBR-322 एक महत्त्वपूर्ण प्लाज्मिड है, जिसमें P-प्लाज्मिड, B- बोलीवर तथा R- ट्रोडिग्स तथा 322 प्रयोग संख्या हैं।

ट्रांसजेनिक फसलें (G. M. Crops)

•  इन फसलों को आनुवांशिक रुपान्तरित फसलें भी कहा जाता है।

•  जैव प्रौद्योगिकी से तैयार ऐसी फसलें जिसमें किसी अन्य जीव का DNA प्रवेश कराकर नए गुणों का विकास किया गया हो, आनुवांशिक रुपान्तरित फसलें कहलाती हैं।

(i)  B. T. कॉटन :- B. T. जीन युक्त कपास किलर कॉटन कहलाती है। इसमें कीटनाशक गुणों का विकास होता है।

(ii)  B. T. बैंगन :- कीटनाशक गुणों से युक्त।

(iii)  ट्रांसजेनिक तम्बाकू :- कीटनाशक गुणों से युक्त सर्वप्रथम तैयार ट्रांसजेनिक पौधा है।

(iv)  ट्रांसजेनिक आलू :- प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है।

(v)  फ्लेवर सावर :-

  • यह टमाटर की एक ट्रांसजेनिक किस्म है।

  • इनकी प्रमुख विशेषता कठोर फल भित्ति तथा उत्तम स्वाद युक्त है।

(vi)  गोल्डन राइस :-

  • चावल की एक ट्रांसजेनिक किस्म है।

  • -केरोटीन युक्त एक ट्रांसजेनिक किस्म है।

  • -केरोटीन विटामिन-A के निर्माण में सहायक है।

ट्रांसजेनिक जन्तु :-

(i)  ट्रांसजेनिक चूहा :-

•  सर्वप्रथम तैयार ट्रांसजेनिक जंतु है।

•  सबसे अधिक मात्रा में तैयार किए गए जंतु भी चूहे हैं।

(ii)  ट्रांसजेनिक मछली :-

•  साल्मन मछली को ट्रांसजेनिक मछली के रूप में विकसित किया।

•  यह प्रथम खाद्य ट्रांसजेनिक जंतु थी।

(iii)  ट्रांसजेनिक गाय :- रोजी

(iv)  ट्रांसजेनिक भेड़ :-

•  प्रथम ट्रांसजेनिक भेड़ जिसे दूध एंटीबॉडीज को उत्पादित करने हेतु तैयार किया गया।

(v)  ट्रांसजेनिक कुत्ता :- Dogie

(vi)  ट्रांसजेनिक बंदर :- Andi

अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य –

•  भारत में जैव प्रौद्योगिकी का जनक प्रोफेसर V. L. चौपड़ा को माना जाता है।

•  हिपेटाइटिस वैक्सीन प्रथम DNA पुनर्योजन वैक्सीन थी, जिसका भारत में व्यावसायिक उत्पादन किया गया।

•  हिपेटाइटिस-C वायरस की खोज के लिए हार्वे जे अल्टर, चार्ल्स राइस तथा माइकल हाउटन को नोबल पुरस्कार 2020 से सम्मानित किया गया।

•  भारत में केवल BT कॉटन ही एक ऐसी ट्रांसजेनिक फसल है, जिसे उत्पादित किया जाता है।

•  ह्यूमलिन एक कृत्रिम इन्सुलिन है, जिसका विकास जैव तकनीक द्वारा किया गया।

•  जीवों को बचाने के लिए भारत ने आनुवांशिक अभियांत्रिकी संस्तुति समिति (GEAC) का गठन किया है, जो कि आनुवांशिक रुपान्तरित अनुसंधान कार्यों की वैधानिकता तथा जन सेवाओं के आनुवांशिक रुपान्तरित जीवों के उपयोग के विषय में निर्णय लेती है।

•  Covid-19 का परीक्षण PCR तकनीक द्वारा किया जाता है, जिसकी खोज वर्ष 1989 में कैरी मुलिस द्वारा की गई।

•  V. K. कश्यप तथा लॉल्जी सिंह ने भारत में DNA फिंगर प्रिंट तकनीक हैदराबाद में विकसित की जबकि विश्व में इसकी खोज ऐलेक जाफरी ने की।

•  नूरी पश्मीना एक ट्रांसजेनिक बकरी है।

•  डॉली एक ट्रांसजेनिक भेड़ थी, जिसका विकास इऑन विल्मुट ने किया था।

•  पुनर्योगज DNA तकनीक की खोज का श्रेय स्टेनलेकोहन, बोयर तथा उसके सहयोगियों को दिया जाता है, जिन्होंने साल्मोनेला व ई. कोलाई जीवाणुओं में पुनर्योगज कर दिखाया।

II – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

•  समुद्र तल से 62 मील या 100 किलोमीटर (कारमन लाइन) की ऊँचाई के बाद का क्षेत्र 'बाहरी अंतरिक्ष' कहलाता है।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम –

•  वर्ष 1962 में डॉ. विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में  'INCOSPAR' (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति) के साथ अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ।

•  15 अगस्त, 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना गई।

•  वर्तमान में ISRO के अध्यक्ष डॉ. के. सिवान है।

•  19 अप्रैल, 1975 में भारत का प्रथम उपग्रह आर्यभट्‌ट को रूस के KOSMOS-3 यान द्वारा छोड़ गया।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के घटक

उपग्रह कक्षाएँ –

1.  निम्न भू-कक्षा/ध्रुवीय कक्षा (Low Parth Orbit) –

•  200 से 2000 किमी. की ऊँचाई पर

•  80 से 130 मिनट में 1 चक्कर पूरा

•  जासूसी उपग्रह, रिमोट सेंसिंग उपग्रह, नेविगेशन आधारित उपग्रह

2.  भू-स्थिर कक्षा (Geo-Stationary Orbit) –

•  36000 किमी. से अधिक ऊँचाई पर

•  मौसम एवं दूरसंचार संबंधी उपग्रह

•  ये पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर

•  ये लगभग 24 घंटे में 1 चक्कर पूरा करते हैं।

उपग्रह प्रक्षेपण यान –

1.  PSLV (Polar Sattelite launching vehicle) – 4 चरणों वाला यान, जिसमें ठोस व द्रव ईंधन प्रयुक्त

2.  GSLV (Geostationary Sattelite launching vehicle) – 3 चरणों वाला यान

  (1) प्रथम चरण – ठोस ईंधन

  (2) द्वितीय चरण – द्रव ईंधन

  (3) तृतीय चरण – क्रायोजेनिक ईंधन

  a. द्रव – O2

  b. द्रव – H2

उपग्रह –

1.  बस (Body) – वह बॉडी, जिसमें सभी उपकरण लगे रहते हैं।

2.  बैटरी (Power) – सोलर पैनल

3.  ऊँचाई नियंत्रण तंत्र

4.  टेलीमेट्री

5.  पेलोड

महत्त्वपूर्ण भारतीय अंतरिक्ष मिशन –

गगनयान – भारत/इसरो का प्रथम अंतरिक्ष अभियान, जिसमें मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

आदित्य-L-1 – इसरो का प्रथम अभियान, जो सूर्य की सतह का अध्ययन करेगा।

चन्द्रयान-2

•  22 जुलाई, 2019 को GSLV MK-111 – M, अर्थात् बाहुबली द्वारा सतीश भवन स्पेस सेंटर, श्री हरिकोटा (आंध्रप्रदेश) से इसे प्रक्षेपित किया गया।

•  चन्द्रयान-2 के प्रमुख अंग –

  (i) ऑर्बिटर

  (ii) लैंडर विक्रम (विक्रम साराभाई के नाम पर)

  (iii) रोवर प्रज्ञान – यह रोवर सौर ऊर्जा से संचालित 6 पहियों वाला रोबोट वाहन है।

•  रोवर प्रज्ञान तथा विक्रम लैण्डर दोनों असफल रहे।

•  यह चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने वाला विश्व का प्रथम मिशन होने वाला था।

भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह तंत्र (IRNSS)

•  वर्तमान नाम – नाविक (Navigation with Indian Constellation)

•  ये उपग्रह तंत्र भारत की भूमि से 1500 किमी. के क्षेत्र को कवर करते हुए क्षेत्रीय नौवहन उपलब्ध कराता है।

•  NAVIC नाम मछुआरों को समर्पित है।

III – सूचना प्रौद्योगिकी

सूचना के प्रकार (3) –

(i)  ऑडियो – FM, AM

(ii)  वीडियो + ऑडियो – TV DTH

(iii)  लिखित संदेश – Fax, मैसेज

सूचना संदेश –

(i)   एनालॉग – TV, टेलीफोन

(ii)  डिजिटल – इंटरनेट, मोबाइल, स्मार्ट TV

•  AM (Amplitude Modulation) की आवृत्ति 535 – 1605 KHZ. होती है जबकि FM (Frequency Modulation) की आवृत्ति 88 MHZ. – 108 MHZ. होती है।

•  सूचना प्रौद्योगिकी में प्रयुक्त तरंगें –

  (i) रेडियो तरंग

  (ii) सूक्ष्म तरंग

  (iii) अवरक्त तरंग

  (iv) दृश्य प्रकाश

  (v) पराबैंगनी विकिरण

  (vi) X-विकिरण

  (vii) गामा-विकिरण

•  रेडियो तथा सूक्ष्म तरंगें मोबाइल, TV, रडार आदि में प्रयुक्त तरंगें हैं।

•  TV, सेटटॉप बॉक्स तथा रिमोट में अवरक्त तरंगें प्रयुक्त होती हैं।

•  Li-Fi (लाइट-फायडेलिटी) में दृश्य प्रकाश तरंगें प्रयुक्त की जाती हैं।

•  आयननकारी विकिरणों में पराबैंगनी, X-विकिरणें तथा गामा विकिरणें सम्मिलित हैं।

•  ब्लू-टूथ 10-15 मीटर की रेंज का बिना तार के संचार का माध्यम होता है, जो 2.4 गीगा हर्ट्ज आवृत्ति पर कार्य करता है।

•  Wi-Fi (वायर लैस फायडेलिटी) की रेंज ब्लू-टूथ से ज्यादा होती है, जो 2.4 तथा 5 गीगा हर्ट्ज आवृत्ति पर कार्य करता है।

•  Wi-Fi कॉलिंग के माध्यम से बिना मोबाइल नेटवर्क के भी मोबाइल से कॉल कर सकते हैं।

•  इंटरनेट के द्वारा आपस में जुड़ी वस्तुएँ इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहलाती है।

IV – रक्षा प्रौद्योगिकी

•  वर्ष 1983 में पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में समन्वित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) प्रारंभ किया गया।

•  इस कार्यक्रम में पाँच प्रकार की मिसाइलों का निर्माण किया गया –

  (i) पृथ्वी

  (ii) अग्नि

  (iii) त्रिशूल

  (iv) नाग

  (v) आकाश

Trick – PATNA

•  पृथ्वी तथा अग्नि मिसाइलें सतह से सतह पर मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है।

•  त्रिशूल व आकाश सतह से हवा में मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है।

•  नाग टैंक रोधी निर्देशित प्रक्षेपास्त्र है।

DRDO (Defence Research and Development Organisation)

•  इसकी स्थापना वर्ष 1958 में हुई थी।

•  इनका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

•  इनके वर्तमान में अध्यक्ष सतीश रेड्‌डी है।

*  प्रमुख विमान / हेलिकॉप्टर / मुख्य टैंक

(i)  तेजस (Tejas)

•  HAL (हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) द्वारा विकसित तेजस भारत का प्रमुख स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है।

•  यह लेजर गाइडेड बम से हमला करने में सक्षम है।

•  इनका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 4 मई, 2003 को रखा था।

(ii)  अर्जुन (Arjun)

•  DRDO द्वारा विकसित ‘अर्जुन’ एक स्वदेशी तकनीक से निर्मित मुख्य युद्धक टैंक है।

•  इसका आधुनिक मॉडल अर्जुन MK II है, जिसका वजन 58.5 टन है।

(iii)  कर्ण (Karna)

•  DRDO द्वारा विकसित मध्यम श्रेणी का युद्धक टैंक है।

•  इसका वजन 48 टन है।

•  इसे Tank ex भी कहते हैं।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल –

•  24 नवम्बर, 2020 को जमीन से वार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

•  यह लाँच के बाद 90 डिग्री कोण पर मुड़कर वार करने में सक्षम मिसाइल है।

•  इसकी मारक क्षमता 400 किमी. तक है।

•  इस मिसाइल को जमीन, समुद्र या हवा से लाँच किया जा सकता है।

Loading

Leave a Comment