पदार्थ का वर्गीकरण

– वह संरचना जिसमें भार हो तथा वह स्थान घेरती है, पदार्थ कहलाती है।

पदार्थों के अभिलक्षण:-

– प्रत्येक पदार्थ का स्वयं का एक आयतन, द्रव्यमान एवं घनत्व होता है।

– प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है। यह छोटे-छोटे कण पदार्थ के अवयवी कण (अणु या परमाणु) होते हैं।

– इन अवयवी कणों के मध्य अन्तराण्विक आकर्षण बल पाया जाता है।

पदार्थ का वर्गीकरण:-

– संगठन के आधार पर पदार्थ को दो भागों में बाँटा गया है-

 1. शुद्ध पदार्थ

 2. मिश्रण

– शुद्ध पदार्थ को दो भागों में विभाजित किया गया है-

1. तत्त्व:-

– ऐसा पदार्थ जिसमें सभी कण समान हो, अर्थात् एक ही प्रकार के कणों के समूह से बने होते हैं, तत्त्व कहलाते हैं। उदाहरण:- हाइड्रोजन, हीलियम, लीथियम आदि।

– तत्त्व धातु, अधातु या उपधातु किसी भी रूप में हो सकते हैं।

– आधुनिक आवर्त सारणी में 118 तत्त्वों को स्थान दिया गया है।

2. यौगिक:-

– जब दो या अधिक तत्त्वों के परमाणु आपस में निश्चित अनुपात में संयोग करके जिस अणु का निर्माण करते हैं, उसे यौगिक कहते हैं। उदाहरण- जल, HCl, N2O, NO2 आदि।

मिश्रण:-

– जब दो या दो से अधिक पदार्थ परस्पर मिलाए जाए एवं उनके मध्य कोई रासायनिक क्रिया न हो तो उसे मिश्रण कहते हैं।

– मिश्रण को दो भागों में विभक्त किया गया है-

1. समांगी मिश्रण:-

– ऐसा मिश्रण जिसमें पदार्थ पूरी तरह परस्पर घुल जाते हैं एवं अन्त में एक ही प्रावस्था प्राप्त होती है, समांगी मिश्रण कहलाते हैं। उदाहरण- जल तथा शक्कर का मिश्रण एवं जल तथा नमक का मिश्रण आदि।

– समांगी मिश्रण के अन्य उदाहरण निम्न हैं-

 1. जल तथा एल्कोहल

 2. अक्रिय गैसों का मिश्रण

 3. मिश्र धातु जैसे पीतल, काँसा, गनमेटल इत्यादि।

2. विषमांगी मिश्रण:-

– ऐसा मिश्रण जिसमें घटक परस्पर पूर्ण मिश्रित (विलेय) नहीं होते हैं अर्थात् पदार्थों की अलग-अलग प्रावस्था दिखाई देती हैं, विषमांगी मिश्रण कहलाते हैं। उदाहरण-

 1. जल तथा मिट्‌टी का मिश्रण

 2. रेत तथा सल्फर का मिश्रण

 3. रेत तथा लौहे के बुरादे का मिश्रण

 4. दाल-चावल

 5. तेल तथा जल का मिश्रण

पदार्थ की अवस्थाएँ:-

– पदार्थ के कणों में उपस्थित अन्तराण्विक आकर्षण बल के आधार पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती है-

 1. ठोस

 2. द्रव

 3. गैस

– वैज्ञानिक प्रयोगों एवं खोजों के आधार पर पदार्थ की दो और अवस्थाएँ खोजी गई है-

 1. प्लाज्मा

 2. बोस-आइन्स्टीन-कन्डन्सेट (B.E.C.)

 अत: पदार्थ की कुल 5 अवस्थाएँ ज्ञात है।

ठोस अवस्था:-

– यह पदार्थ की सबसे व्यवस्थित अवस्था है।

– ठोस अवस्था में पदार्थ के अवयवी कणों के मध्य प्रबल अन्तराण्विक आकर्षण बल पाया जाता है जिसके कारण ठोस कण अत्यधिक नजदीक होते हैं एवं एक निश्चित ज्यामिति बनाते हैं।

– ठोस का आकार, आयतन एवं घनत्व निश्चित होते हैं।

– ठोस पदार्थ असम्पीड्य होते हैं।

– ठोस की अवस्था ताप के कारण परिवर्तित होती है किन्तु दाब के कारण ठोस अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है इसलिए ठोस असम्पीड्य होते हैं। उदाहरण- बर्फ को ताप देने पर वह जल में परिवर्तित हो जाता है।

– ठोस सामान्यतया कठोर होते हैं।

– ठोसों में बहने का गुण नहीं पाया जाता है। (अपवाद- अक्रिस्टलीय ठोस जैसे काँच में बहने का गुण विद्यमान होता है, यह सामान्यतया धीरे-धीरे बहते हैं इस कारण इन्हें अतिशीतित द्रव अथवा आभासी ठोस कहा जाता है।)

– ठोसों में उच्च अन्तराण्विक आकर्षण बल के कारण इनका गलनांक उच्च होता है। उदाहरण- पत्थर, बर्फ, पेन, चॉक, चीनी आदि।

ठोसों का वर्गीकरण:-

– ज्यामिति के आधार पर ठोस दो प्रकार के होते हैं-

 1. क्रिस्टलीय ठोस

 2. अक्रिस्टलीय ठोस

1. क्रिस्टलीय ठोस:-

– ऐसे ठोस जिनकी ज्यामिति संरचना निश्चित होती है, क्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं। उदाहरण- नमक, हीरा, बर्फ, ग्रेफाईट।

2. अक्रिस्टलीय ठोस:-

– ऐसे ठोस जिनकी ज्यामिति संरचना अनिश्चित होती है, अक्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं। उदाहरण- कोयला, काँच, रबर, प्लास्टिक आदि।

द्रव अवस्था:-

– पदार्थ की वह अवस्था जिसमें तरलता का गुण होता है, द्रव अवस्था कहलाती है।

द्रव अवस्था के गुण:-

– द्रव पदार्थों का आकार अनिश्चित होता है। यह पात्र पर निर्भर करता है।

– द्रव पदार्थ का आयतन निश्चित होता है।

– द्रव पदार्थ में अवयवी कणों के मध्य आकर्षण बल कम होता है अर्थात् कण दूर-दूर होते हैं।

– द्रव असम्पीड्य होते हैं।

– द्रव में बहने का गुण पाया जाता है।

श्यानता:-

– द्रव की सतह तथा जिस सतह पर द्रव बह रहा है उनके मध्य घर्षण, श्यानता कहलाता है।

– यदि कोई पदार्थ तीव्र गति से प्रवाहित होता है तो उसकी श्यानता कम होती है।

– श्यानता तरलता पर निर्भर करती है।

 

 अर्थात् तरलता बढ़ने पर श्यानता घटती है।

गैसीय अवस्था:-

– गैसीय अवस्था में पदार्थ के कणों के मध्य अन्तराण्विक आकर्षण बल का मान कम होता है अर्थात् कण दूर-दूर होते हैं।

– गैसीय पदार्थ का आकार अनिश्चित होता है।

– गैसीय पदार्थ का आयतन अनिश्चित होता है।

 उदाहरण- वायु, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि।

– गैसें गर्म करने पर ठोस और द्रव की अपेक्षा अधिक फैलती है क्योंकि इनमें द्रव और ठोस की अपेक्षा अन्तराण्विक बल दुर्बल होते हैं।

प्लाज्मा:-

– प्लाज्मा की खोज विलिमय क्रूक्स ने की।

– प्लाज्मा का नामकरण इरविन लेग्इम्यूर ने किया था।

– प्लाज्मा लेटिन भाषा के शब्द प्लाज्मिक से लिया गया है जिसका अर्थ है चमकता हुआ।

– प्लाज्मा पदार्थ की चौथी अवस्था है।

– यह ब्रह्माण्ड में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली अवस्था है।

– यह अवस्था आयनिक अवस्था होती है अर्थात् पदार्थ की एकमात्र अवस्था जिसमें आयन तथा इलेक्ट्रॉन परस्पर स्वतंत्र रहते हैं।

– प्लाज्मा पदार्थ की एकमात्र अवस्था है जिसमें पूर्ण रूप से विद्युत का चालन होता है।

– रेडियो तरंगों के लिए प्लाज्मा उत्तरदायी है।

– उच्च ताप के कारण तारों पर भी प्लाज्मा अवस्था पाई जाती है।

– निऑन बल्ब तथा CFL में प्लाज्मा का उपयोग किया जाता है।

बोस-आइन्स्टीन-कन्डेन्सेट (B.E.C.):-

– यह पदार्थ की 5वीं अवस्था है।

– इसका नाम भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर सत्येन्द्र नाथ बोस एवं अल्बर्ट आइन्स्टीन के सम्मान में रखा गया।

– यदि किसी गैस को परम शून्य ताप, अति उच्च दाब पर गर्म एवं उच्च वोल्टता प्रदान की जाती है तो प्राप्त अवस्था B.E.C. होती है।

– आइन्स्टीन की द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण के आधार पर यह अवस्था प्राप्त होती है।

– सन् 2001 में एरिक कर्नेल, उल्फगैंग केटरले एवं कार्ल.ई.वैमेन ने सर्वप्रथम B.E.C. अवस्था बनाई। इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पदार्थों में अवस्था परिवर्तन:-

– ताप व दाब के आधार पर पदार्थों में अवस्था परिवर्तन संभव है।

– गलन, हिमन, वाष्पन, संघनन, उर्ध्वपातन एवं निक्षेपण अवस्था परिवर्तन की प्रक्रियाएँ है।

गलन:-

– किसी पदार्थ की ठोस अवस्था का द्रव अवस्था में बदलना, गलन कहलाता है। उदाहरण- बर्फ का पानी में परिवर्तन।

हिमन:-

– किसी पदार्थ की द्रव अवस्था का ठोस अवस्था में परिवर्तन, हिमन कहलाता है। उदाहरण- पानी का बर्फ बनना।

वाष्पन:-

– किसी पदार्थ की द्रव अवस्था का गैसीय अवस्था में परिवर्तन होना, वाष्पन कहलाता है। उदाहरण- जल का वाष्प बनना।

संघनन:-

– किसी पदार्थ की गैसीय अवस्था का द्रव अवस्था में परिवर्तन होना, संघनन कहलाता है। उदाहरण- जलवाष्प का जल में परिवर्तित होना।

उर्ध्वपातन/निक्षेपण (Leaching):-

– किसी गैसीय अवस्था का सीधा ठोस अवस्था में परिवर्तन होना, उर्ध्वपातन कहलाता है। उदाहरण- कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का ठोस कार्बन डाई ऑक्साइड (शुष्क बर्फ) में बदलना।

उर्ध्वपातन (Sublimation):-

– किसी पदार्थ की ठोस अवस्था का सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तन होना, उर्ध्वपातन कहलाता है। उदाहरण- कपूर, नौसादर, आयोडीन आदि।

पदार्थ के गुण:-

1. भौतिक गुण:-

– पदार्थ के आकार, आयतन, घनत्व एवं द्रव्यमान को पदार्थ के भौतिक गुणों में सम्मिलित किया जाता है।

2. रासायनिक गुण:-

– पदार्थ के अणुसूत्र, रासायनिक क्रियाएँ, अम्लता, क्षारकता इत्यादि को पदार्थ के रासायनिक गुणों में सम्मिलित किया गया है।

पदार्थ के गुणों में परिवर्तन:-

– गुणों के आधार पर पदार्थों में दो प्रकार के परिवर्तन होते हैं-

1. भौतिक परिवर्तन:-

– ऐसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ के केवल भौतिक गुण बदलते हैं तथा कोई नया पदार्थ नहीं बनता, भौतिक परिवर्तन कहलाता है। उदाहरण- जल का बर्फ बनना या जल का जलवाष्प में परिवर्तित होना।

– अन्य उदाहरण जैसे काँच का टूटना, स्वर्ण का पिघलना, लकड़ी का टूटना, सब्जी एवं फलों को काटना आदि।

भौतिक परिवर्तन के गुण:-

– भौतिक परिवर्तन में पदार्थ के केवल भौतिक गुण ही परिवर्तित होते हैं।

– कोई नया पदार्थ नहीं बनता।

– यह एक अस्थायी परिवर्तन है। अत: इसे उत्क्रमणीय परिवर्तन भी कहते हैं। उदाहरण- मोम का पिघलना, सेब का कटना, वाष्पन, संघनन, हिमन, गलन इत्यादि।

रासायनिक परिवर्तन:-

– पदार्थों में होने वाला ऐसा परिवर्तन, जिसमें पदार्थ के भौतिक एवं रासायनिक गुण बदल जाते हैं एवं नए पदार्थ का निर्माण होता है, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। उदाहरण- दूध का दही में बदलना, लोहे पर जंग लगना।

– रासायनिक परिवर्तन के अन्य उदाहरण-  दहन, लकड़ी, कोयले, पेट्रोल, डीजल एवं कागज आदि का दहन रासायनिक परिवर्तन है परन्तु कपूर का दहन एक भौतिक परिवर्तन है।

– श्वसन, भोजन का पकना, भोजन का पचना, संक्षारण (लोहे पर जंग, चाँदी का काला होना, ताँबे पर हरे रंग की परत), प्रकाश संश्लेषण एवं फल तथा सब्जियों का सड़ना, किण्वन, कटे हुए सेब का भूरा होना, मेहन्दी का रचना रासायनिक परिवर्तन है।

क्र.सं.

भौतिक परिवर्तन

रासायनिक परिवर्तन

1.

इसमें केवल भौतिक गुण बदलते हैं।

इसमें भौतिक एवं रासायनिक गुणों में परिवर्तन होता है।

2.

इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता है।

इसमें नए पदार्थ का निर्माण होता है।

3.

परिवर्तन का कारण हटाने पर पदार्थ अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौट आता है।

परिवर्तन का कारण हटाने पर पदार्थ अपनी प्रारंभिक अवस्था में नहीं आ पाता है।

4.

यह एक उत्क्रमणीय  परिवर्तन है।

यह एक अनुत्क्रमणीय परिवर्तन है।

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