रबर सीमेंट तथा मिश्र धातु

–  रबर वर्तमान युग का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पदार्थ है जिसका उपयोग हम दैनिक जीवन के क्रियाकलापों में करते हैं।

–  रबर भूमध्यरेखीय सदाबहार वनों में पाए जाने वाले वृक्ष के दुध से प्राप्त किया जाता है, जिसे लेटेक्स कहते हैं।

–   प्रारंभ में रबर का प्रयोग पेंसिल के निशान मिटाने में किया जाता था इस कारण ही इसका नाम रबर पड़ा।

–  प्रत्यास्थता, जल प्रतिरोधी तथा विद्युत कुचालकता के कारण यह उद्योग धंधों में काम आने लगा।

–  20वीं सदी के आरंभ में मलाया तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया के अन्य देशों के बागानों में इसकी कृषि प्रारंभ की गई जिसे बागानी रबर के नाम से जाना जाने लगा।

–  अमेरिका को दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों से जब रबर मिलना बंद हो गया तब इन देशों ने कृत्रिम रबर का निर्माण किया।

– कृत्रिम रबर दो प्रकार के होते हैं-

1. प्राकृतिक रबर:-

– इसे रबर के वृक्ष के लेटेक्स से प्राप्त किया जाता है। यह आइसोप्रीन  का समपक्ष बहुलक है या दूसरें शब्दों में इसे पॉलिआइसोप्रीन भी कह सकते हैं। इसे स्प्रिंग की तरह खींचा जा सकता है और यह प्रत्यास्थता का गुण प्रदर्शित करता है।

2. संश्लेषित रबर (Synthetic Rubber):-

–  संश्लेषित रबर निम्न प्रकार के होते हैं-

(i) निओप्रीन रबर:-

–  क्लोरोप्रीन (2-क्लोरो-1, 3 ब्यूटाडाईन) के बहुलक के द्वारा बनती है तथा संश्लेषित रबर भी कहलाती है।

– यह वनस्पति और खनिज तेल के प्रति प्रतिरोधी होती है।

– इसका उपयोग वाहक पट्‌टे, गैस्केट विद्युत केबल और हौजों को बनाने में किया जाता है।

(ii) ब्यूना-N:-

– 1, 3-ब्यूटाडाईन और ऐक्रिलोनाइट्राइल के बहुलकन द्वारा बनती है।

–  इसका प्रयोग तेल की सील, टंकी के लिए अस्तर बनाने में किया जाता है।

(iii) थाईकॉल:-

–   यह रबर डाईक्लोरोऐथेन एवं पॉलिसल्फाईड की अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।

–  इसके मिश्रण का उपयोग रॉकेट ईंधन के रूप में किया जाता है क्योंकि यह ऑक्सीजन मुक्त करता है। यह ठोस प्रणोदक है।

–  थाईकॉल का प्रयोग खनिज तेल ले जाने वाले पाईप बनाने में, विलायक जमा करने वाले टंकी के अस्तर बनाने में किया जाता है।

रबर का वल्कनीकरण:-

– इस प्रक्रिया में अपरिष्कृत रबर को इसके गुणों जैसे प्रतिरोध और प्रत्यास्थता को सुधारने के लिए सल्फर के साथ गर्म किया जाता है इस प्रकार प्राप्त वल्कनीकृत रबर मजबूत, रसायनों के प्रति अधिक प्रतिरोधी और उच्च ताप सहन करने वाला होता है।

 

सीमेन्ट

– यह कैल्शियम सिलिकेट तथा कैल्शियम एल्युमिनेट से बना धूसर रंग का मिश्रण होता है।

–  सीमेन्ट का निर्माण सर्वप्रथम ऑस्पीडन के द्वारा किया गया, जिसे पोर्टलैण्ड सीमेन्ट कहते हैं जिसमें चूना पत्थर (CaO), सिलिका (SiO2), एल्युमिना (Al2O3) तथा फेरस, सल्फर आदि के ऑक्साइड होते हैं।

            CaO = 60-65%

            SiO2 = 20-25%

            Al2O3 = 5-10%

            Fe, S  के ऑक्साइड = 2-3%

–  सीमेन्ट निर्माण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री में CaO को चूना पत्थर से जबकि सिलिका तथा एल्युमिना को रेत से प्राप्त किया जाता है।

– जैसे ही सीमेन्ट में पानी मिलाया जाता है, तो कैल्शियम सिलीकेट तथा कैल्शियम एल्युमिनेट बनता है जो वायु के सम्पर्क में आते ही ठोस हो जाता है जिसे सीमेन्ट का जमना कहते हैं।

– सीमेन्ट के जमने के समय को बढ़ाने के लिए इसमें 2-3 प्रतिशत जिप्सम मिलाया जाता है।

            CaSO4.2H2O = जिप्सम

            CaSO4. H2O = POP (प्लास्टर ऑफ पेरिस)

–           यदि सीमेन्ट में CaO की मात्रा अधिक होगी तो इसमें दरारें जल्दी पड़ जाती है जबकि सिलिका की मात्रा अधिक होने पर सीमेन्ट जल्दी जम जाती है।

मिश्रधातुएँ:-

– दो या दो से अधिक धातुओं का समांगी मिश्रण, मिश्रधातु कहलाता है।

– मिश्रधातुओं के निर्माण में एक धातु के कुछ परमाणु दूसरी धातु द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं।

– यदि मिश्रधातु में एक धातु पारा हो तो इसे अमलगम कहते हैं जैसे- Na-Hg = सोडियम अमलगम

            Zn-Hg = जिंक अमलगम

– मिश्रधातु निर्माण के लिए धातु परमाणुओं के आकार में अधिक अंतर नहीं होना चाहिए, यही कारण है कि d-खण्ड के तत्त्व मिश्रधातुओं का निर्माण अधिक करते हैं।

निम्न मिश्रधातुएँ:-

पीतल – Cu + Zn

काँसा – Cu + Sn (बेल धातु)

गनमेटल – Cu + Zn + Sn

जर्मन सिल्वर – Cu + Zn + Ni

कोन्स्टेन्टन – Cu + Ni

नाइक्रोम – Ni +Cr

सोल्डर – Pb + Sn

स्टेनलैस स्टील – Fe + Cr

– लेन्थेनॉइड तत्त्वों द्वारा बने मिश्रधातुओं को मिशधातु कहते हैं।

– मिशधातु में 95 प्रतिशत सैरियम (Ce) पाया जाता है। इसका उपयोग बन्दूक की गोलियाँ बनाने में किया जाता है।

–  मैंग्नीशियम से बने मिशधातु का उपयोग जेट इंजन के कलपूर्जे बनाने में किया जाता है।

 

             

 

Loading

Leave a Comment