मानव शरीर परिसंचरण तंत्र

दायाँ निलय –

– मोटी भित्ति एवं कम आयतन वाला कोष्ठ जो दाएँ आलिन्द से अशुद्ध रक्त प्राप्त करता है।

– यहाँ से अशुद्ध रक्त पल्मोनरी धमनी के द्वारा फेफड़ों तक पहुँचता है, जहाँ इसका ऑक्सीजनीकरण होता है।

बायाँ आलिन्द

– ये पल्मोनरी शिराओं के द्वारा फेफड़ों से ऑक्सीजनित रक्त प्राप्त करता है।

– यहाँ से ऑक्सीजनित रक्त द्विवलनी / मिट्रल कपाट से होता हुआ बाएँ निलय में पहुँचता है।

बायाँ निलय –

– यह सबसे मोटी भित्ति वाला तथा सबसे कम आयतन वाला कोष्ठ है।

– यहाँ संकुचन के समय रक्त को दबाव के साथ पूरे शरीर में महाधमनी के द्वारा पम्प किया जाता है।

– पल्मोनरी धमनी व महाधमनी के सिरों पर अर्धचन्द्राकार कपाट पाए जाते हैं।

– दाएँ आलिन्द व दाएँ निलय के बीच त्रिवलनी तथा बाएँ आलिन्द व बाएँ निलय के बीच द्विवलनी कपाट पाए जाते हैं, जिसे मिट्रल कपाट भी कहते हैं।

हृदय धड़कन

– हृदय का धड़कना एक अनैच्छिक क्रिया है।

– इसका नियमन मेडूला ऑब्लागेटा में स्थित कार्डियक सेंटर से होता है।

– यहाँ से हृदय धड़कन के संदेश तंत्रिकाओं द्वारा दाएँ आलिन्द में पहुँचते हैं।

– एक स्वस्थ मनुष्य का हृदय 72 बार प्रति मिनट की दर से धड़कता है। लेकिन कठोर परिश्रम के समय एक मजदूर का हृदय 180 बार प्रति मिनट तक धड़क सकता है।

– हृदय धड़कन पर तंत्रिकीय नियंत्रण के अलावा हॉर्मोन्स का प्रभाव भी पड़ता है, जो निम्न है-

– एड्रीनलीन हॉर्मोन्स जो आपातकालीन परिस्थितियों में हृदय धड़कन को बढ़ाता है।

– नॉर एड्रीनलीन हॉर्मोन्स जो सामान्य परिस्थितियों में हृदय धड़कन को बढ़ाता है।

– थायरॉक्सिन हॉर्मोन्स उपापचयी क्रियाओं को बढ़ाकर हृदय धड़कन को बढ़ाता है।

– हृदय धड़कन का नियंत्रण हृदय संकुचन की दर के द्वारा होता है।

– शिरा आलिन्द पर्व (Sino-Atrial node) – SA  नोड द्वारा हृदय लयबद्ध संकुचन होता है, जिसे पेसमेकर कहते है।

– इसे नोड ऑफ की कीथी फ्लेक भी कहते है।  

– Atrio-Ventcricular Node (आलिन्द निलय पर्व)

– इसे पेससेटर कहा जाता है।

– इसे नोड ऑफ एरकॉक ट्वारा भी कहते हैं ।

हृदय ध्वनियाँ –

– हृदय धड़कन के समय कपाट बंद होने पर हृदय ध्वनियाँ सुनाई दी जाती है।

प्रथम हृदय ध्वनि –

– निलय संकुचन के समय त्रिवलनी एवं द्विवलनी कपाट के बंद होने पर उत्पन्न होती है।

– यह lubb के रूप में सुनाई देती है।

– यह 0.15 सेकण्ड तक सुनाई देती है, जो धीमी होती है।

द्वितीय हृदय ध्वनि –

– निलय संकुचन पूर्ण हो जाने पर अर्धचन्द्राकार कपाटों के बंद होने पर उत्पन्न होती है।

– यह DUB के रूप में 0.1 सेकण्ड तक सुनाई देती है।

– यह तीव्र होती है।

– इन्हीं ध्वनियों को स्टैथोस्कोप से सुनकर डॉक्टर स्पन्दन की जाँच करते है।

Every Day science –

– मानव हृदय का सबसे मोटा भाग बाएँ निलय की दीवार होती है।

– मादा की धड़कन लगभग 78 बार प्रति मिनट तथा नर की लगभग 70 बार प्रति मिनट होती है।

– हृदय के कपाट एक दिन में लगभग 1 लाख बार खुलते व बंद होते है।

– बायाँ आलिन्द 75% रुधिर को बिना बल लगाए बाएँ निलय में पम्प करता है। अत: किसी व्यक्ति के बाएँ आलिन्द में या मिट्रल कपाट में कमी हो तो भी वह व्यक्ति सामान्य जीवित रह सकता है।

रुधिर दाब

– जब निलय अपने आंकुचन द्वारा धमनियों में रुधिर पम्प करते हैं, तो रुधिर का दाब धमनियों की दीवार पर पड़ता है, इसी दाब को रुधिर दाब कहते है।

– स्वस्थ मनुष्य में संकुचन दाब (Systol) 120mmHg तथा आंकुचन (प्रसरण&Diastol) दाब 80mmHg होता है।

– रक्त दाब को स्फिग्नोमैनोमीटर द्वारा मापा जाता है। 

हृदय (Heart)

–  डॉ. विलियम हार्वे ने मानव परिसंचरण तंत्र के बारे में विस्तृत रुप से बताया था।

–  मानव परिसंचरण तंत्र में निम्न सम्मिलित हैं-

1. मानव हृदय (Heart)

2. रक्त (Blood)

3. रक्त नलिकाएं (Bloods vessels)

4. लसिका तंत्र (Lymphatic system) 

हृदय (Heart)

 

–  मानव हृदय पेशियों का बना अंग है, जो कि वक्ष गुहा में मीडीस्टाईनम अवकाश में बाएँ फेफड़ों की ओर स्थित होता हैं।

–  मानव का हृदय गुलाबी रंग का शंक्वाकार, खोखला व स्पन्दनशील होता है, जो फेफड़ों के बीच कुछ बाईं ओर होता है।

–  मानव का हृदय बंद मुठ्ठी के आकार का होता है।

–  यह एक दोहरी झिल्ली पेरी कार्डियम से घिरा रहता है।

–  मनुष्य में हृदय का वजन 250-350g.m. होता है।

–  मनुष्य में हृदय का वजन महिलाओं की तुलना में पुरुषों का अधिक होता है।

–  हृदय की संरचना एवं कार्यिकी के अध्ययन की शाखा को हृदय विज्ञान (Cardiology) कहते है।

–  हृदय का कार्य रक्त को पम्प करते हुए वि भिन्न अंगो तक पहुँचाना है।

–  मानव हृदय में 4 कोष्ठ (दो आलिन्द व दो निलय) होते है।

दायाँ आलिन्द –

–  यह सबसे बड़ा कोष्ठ है।

–  यह इनकी दीवारें पतली होती हैं।

–  यह सम्पूर्ण शरीर से विऑक्सीजनित रक्त निम्न 3 नलिकाओं से प्राप्त करता है-

–  अग्र महाशिरा

–  पश्च महाशिरा

–  कोरोनरी साइनस

–  दाएँ आलिन्द से विऑक्सीजनित रक्त त्रिवलनी कपाट से होता हुआ दाएँ निलय में पहुँचता है।

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