मानव शरीर परिसंचरण तंत्र Part 3

परिसंचरण

परि – चारों ओर

संचरण = पदार्थों की गति

जीवों में पाया जाने वाला वह तंत्र/सिस्टम, जिसके द्वारा विभिन्न पोषक पदार्थों/Nutrients, उत्सर्जी पदार्थों/Excretory products, गैसों, हॉर्मोन्स, एंजाइम्स आदि का परिवहन (Transportation) किया जाता है, परिसंचरण तंत्र कहलाता है।

जंतुओं में परिसंचरण तंत्र 2 प्रकार के हैं –

(i)  खुला परिसंचरण तंत्र (Open circulatory system)

(ii) बंद परिसंचरण तंत्र (Closed circulatory system)

खुला परिसंचरण तंत्र

(Open circulatory system)

बंद परिसंचरण तंत्र

(Closed circulatory system)

इसमें हृदय से निकल कर रक्त सीधे शरीर के विभिन्न भागों (साईनस) में पहुँच जाता है।

उदाहरण – अकशेरुकी प्राणी (Invertebrates), कीट वर्ग के सदस्य, स्टार फिश, चपटे कृमि, एस्केरिस आदि

इसमें रक्त बंद नलिकाओं (closed vessels) में प्रवाहित होकर विभिन्न अंगों तक पहुँचता है।

उदाहरण- कशेरुकी प्राणी (Vertebrates), मत्स्य वर्ग, उभयचर/Amphibians, सरीसृप/Reptiles, पक्षी/Aves तथा स्तनधारी/Mammals

एनेलिडा वर्ग के सदस्य  (केंचुआ/Earthworm) अकशेरुकी हैं, लेकिन इनमें बंद परिसंचरण तंत्र पाया जाता है।

 

दोहरा परिसंचरण तंत्र

(Double Circulatory System)

2 आलिंद (Atrium)

2 निलय (Ventricle)

4 कोष्ठीय हृदय (सबसे विकसित हृदय) :- स्तनधारी/Mammals, पक्षी/Aves, मगरमच्छ/Crocodile(अपवाद/Exception)

मत्स्य वर्ग में 2 कोष्ठीय हृदय पाया जाता है।

2 कोष्ठीय (मत्स्य वर्ग/Pisces) हृदय/2 chembered heart

एक परिसंचरण तंत्र/Single Circulatory system

3 कोष्ठीय हृदय – उभयचर/Amphibians उदाहरण – मेंढक

अपूर्ण दोहरा परिसंचरण तंत्र

3 कोष्ठीय हृदय – सरीसृप। उदाहरण – साँप, छिपकली आदि।

अपूर्ण दोहरा परिसंचरण तंत्र (Partial double circulatory system)

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