मानव शरीर परिसंचरण तंत्र

E.C.G. (इलेक्ट्रोकाड्रियोग्राफी)

– इसकी खोज 'एंथोवेन' नामक वैज्ञानिक ने की थी, इसलिए इन्हें 1924 में नोबेल पुरस्कार मिला।

– E.C.G. को सर्वप्रथम 'वॉलेर' ने रिकॉर्ड किया।

– हृदय की क्रियाविधि की जाँच के लिए E.C.G. का प्रयोग किया जाता है।

– ECG में हृदय धड़कन के दौरान उत्पन्न तरंगों को आरेख के रूप में दर्शाया जाता है।

Daily Science –

– वयस्क मनुष्य का हृदय 1 मिनट में 72 बार धड़कता है।

– प्रत्येक धड़कन के साथ लगभग 70-72 ml रक्त को पंप किया जाता है अर्थात् 1 मिनट में 72 × 70 ml लगभग पूरा रक्त एक बार पंप कर दिया जाता है।

रक्त (Blood) –

– यह एक तरल संयोजी ऊतक है, जिसका संपूर्ण बाह्य कोशिकीय तरल का 30-32% होता है।

– वयस्क मानव में रक्त का आयतन 5 से 5\(\frac{1}{2}\) लीटर होता है।

– रक्त की pH लगभग 7.4 होती है।

– रक्त लाल रंग का हल्का क्षारीय होता है।

– रक्त के संघटन में निम्न शामिल है –

(a) तरल भाग (प्लाज्मा) – 55%

(b) ठोस (कणिकीय भाग) – 45%

I. तरल भाग (Plasma)

– इसमें अधिकांश मात्रा जल की होती है, जो 90-92% होती है तथा 8-10% मात्रा में अन्य पदार्थ होते हैं।

– 6-8% प्लाज्मा प्रोटीन पायी जाती है, जिसमें एल्ब्यूमिन, ग्लोब्यूलिन, फाइब्रिनोजन आदि प्रमुख है।

– इसमें गैसें घुलित अवस्था में O2 व CO2 पायी जाती है।

– इसमें पोषक पदार्थ के रूप में वसीय अम्ल, ग्लिसरॉल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल पाए जाते हैं।

– तरल/प्लाज्मा में N2 युक्त अपशिष्ट पदार्थ पाए जाते हैं।

– इसके अतिरिक्त हॉर्मोन्स, एन्जाइम्स, प्रतिस्कंदक पदार्थ, स्कंदन कारक, एंटीबॉडीज पाए जाते हैं।

सीरम (Serum) –

– रुधिर के थक्के हेतु कारक भी प्लाज्मा में पाए जाते हैं, इन कारकों को स्कंदक कारक कहते हैं।

– स्कंदक कारक रहित प्लाज्मा को सीरम कहते हैं।

Important Fact –

– प्लाज्मा में उपस्थित प्रोटीन प्लाज्मा को गाढ़ापन (Viscosity) देते हैं। यही प्रोटीन मानव रक्त की श्यानता का कारण है।

रक्त प्लाज्मा के कार्य –

1. यह हल्के पीले रंग का क्षारीय तरल है, जो कि प्रतिरक्षा में सहायक है।

2. ताप नियमन

3. शरीर में जल संतुलन

4. pH को नियमित बनाए रखना (क्योंकि रक्त प्लाज्मा में बफर पदार्थ उपस्थित होता है।)

5. फाइब्रिनोजन रक्त में सहायता ग्लोब्यूलिन प्रतिरक्षी तंत्र तथा एल्ब्यूमिन परासरण संतुलन बनाए रखना।

 

II. ठोस (कणिकीय) भाग

(a) RBC

(b) WBC

(c) प्लेटलेट्स

1.   RBC(Red Blood Corpuscles)/रक्ताणु/इरिथ्रोसाइट्स

– 50-55 लाख/mm3 (नर)

– 40-45 लाख/mm3 (मादा)

– मानव की RBC द्विअवतलाकार होती है।

– स्तनधारियों की RBC में केंद्रक अनुपस्थित होते हैं, लेकिन ऊँट एवं लामा की RBC केंद्रकयुक्त होती है।

– RBC में माइटोकाॅन्ड्रिया, अंत प्रदव्यी जालिका तथा गॉल्जीकाय भी अनुपस्थित होते हैं।

– इतने कोशिकांगों का न पाया जाना एक प्रकार का क्रियात्मक अनुकूलन है, ताकि RBC में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में हीमोग्लोबीन आ सके तथा इसके द्वारा गैसीय परिवहन भी अधिक हो सके।

– RBC में अनाॅक्सी श्वसन होता है।

– शरीर में O2 के स्तर में कमी होने पर वृक्क (Kidney) द्वारा इरिथ्रोपोएटिन का स्रवण होता है।

– यह इरिथ्रोपोएटिन रक्त में मिलकर अस्थिमज्जा को प्रेरित करता है तथा अस्थिमज्जा में RBC निर्माण की गति तेज हो जाती है।

– मनुष्य में RBC का जीवनकाल 120 दिन होता है।

– अत्यधिक परिश्रम करने पर पहाड़ी क्षेत्रों में RBC की संख्या में असामान्य कमी को इरिथ्रोसाइटोपिनिया (एनिमिया, मलेरिया) तथा असामान्य वृद्धि को पॉलीथाइथिनियाँ कहते हैं।

Loading

Leave a Comment