अम्ल, क्षारक एवं लवण

अम्ल, क्षारक एवं लवण

            सभी यौगिकों को उनके रासायनिक गुणों के आधार पर अम्ल, क्षारक और लवण में वर्गीकृत किया जा सकता है। इनमें कुछ विशिष्ट गुण होते हैं जो एक यौगिक को दूसरे से अलग करते हैं।

            अम्ल (Acids)

            एसिड शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द 'एडिसन' (acidus) से हुई है, जिसका अर्थ है 'खट्टा'। अत: अम्ल वे पदार्थ  हैं जिनका स्वाद खट्‌टा होता है। अम्ल या क्षारक की उपस्थिति के कारण भोजन का स्वाद कड़वा या खट्‌टा होता है।

            उदाहरण :-

HCL, HNO3 तथा H2SO4 आदि अम्ल हैं।

            अम्लों के प्रकार (Types of Acids)

         अकार्बनिक अम्ल या खनिज अम्ल (Inorganic or Mineral Acids) – अकार्बनिक अम्लों को खनिजों से प्राप्त किया जाता है। उदाहरण हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), नाइट्रिक अम्ल (HNO3), सल्फयूरिक अम्ल (H2 SO4) आदि।

  1. कार्बनिक अम्ल (Organic Acids) – ये पौधों व जन्तुओं से प्राप्त किए जाते हैं। ये दुर्बल अम्ल हैं। उदाहरण ऑक्सेलिक अम्ल, लैक्टिक अम्ल, यूरिक अम्ल, ऐसीटिक अम्ल आदि।
  2. हाइड्रा अम्ल (Hydra Acids) – जिन अम्लों में केवल हाइड्रोजन पाया जाता है, उन्हें हाइड्रा अम्ल कहते हैं। उदाहरण हाइड्रोफ्लोरिकल अम्ल (HF), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), हाइड्रोसायनिक अम्ल (HCN) आदि।
  3. ऑक्सी अम्ल (Oxy Acids) – जिन अम्लों में हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन दोनों पाए जाते हैं, उन्हें आँक्सी अम्ल कहते हैं। उदाहरण सल्फ्यूरिक अम्ल (H2 SO4), फॉस्फोरिक अम्ल (H3 PO4) आदि।
  4.  प्रबल अम्ल (Strong Acids) – ये अपने जलीय विलयन में पूर्णतया आयनित हो जाते हैं। उदाहरण हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), नाइट्रिक अम्ल (HNO3), सल्फयूरिक अम्ल (H2 SO4) आदि।
  5. दुर्बल अम्ल (Weak Acids) – ये अपने जलीय विलयन में  आंशिक रूप से आयनित होते हैं। अत: इनके जलीय विलयन में आयन तथा अणु दोनों उपस्थित होते  हैं। उदाहरण – ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH), फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4), कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) आदि।
  6. तनु अम्ल ( Dilute Acids) – इनके जलीय विलयन में अम्ल् की सान्द्रता (मात्रा) अपेक्षाकृत कम होती है।
  7. सान्द्र अम्ल (Concentrated Acids) – इनके जलीय विलयन में अम्ल की सान्द्रता (मात्रा) अपेक्षाकृत अधिक होती है।

 

            अम्लो के गुण (Properties of Acids)

(i)        अम्ल धातु से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस देते हैं।

अम्ल + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस

 (ii)      अम्ल सभी धातु कार्बोनेट तथा धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके संगत लवण, कार्बन

            डाइऑक्साइड एवं जल बनाते हैं।

            धातु कार्बोनेट/धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट + अम्ल लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल

(iii)      अम्ल और क्षारक की परस्पर अभिक्रिया के परिणामस्वरूप लवण तथा जल प्राप्त होते हैं। इसे उदासीनीकरण म अभिक्रिया (neutralisation reaction) कहते हैं।

            अम्ल + क्षारक लवण + जल

            HCl (aq) + NaOH (aq) → NaCl(aq) + H2O

            हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सोडियम हाइड्रॉक्साइड मा सोडियम क्लोराइड

(iv)      अम्ल, धात्विक ऑक्साइडों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा जल

            धातु ऑक्साइड + अम्ल→ लवण + जल

            क्षारक और अम्ल की अभिक्रिया के समान धात्विक ऑक्साइड अम्लों  से अभिक्रिया करके लवण और जल देते हैं। अतः धात्विक ऑक्साइड क्षारकीय ऑक्साइड भी कहते हैं।

(v)       अम्ल जल में घोले जाने पर H+ (aq) (हाइड्रोजन आयन) या H3O+ (aq) (हाइड्रोनियम आयन) या  देते हैं।

            उदाहरण HCl + H2O " H3O+ (aq) + Cl (aq) विलयन में H+ (aq) आयनों के कारण पृथक् करना सम्भव नहीं है अर्थात् H+ आयन अकेले प्राप्त नहीं हो सकते हैं, ये जल के अणुओं से संयुक्त होने के पश्चात् ही मिलते हैं।

            H+ + H2O" H3O+

–           कार्बोक्सिलिक अम्ल, ऐल्कोहॉल से अभिक्रिया करके मीठी गन्धयुक्त यौगिक एस्टर बनाते हैं। यह अभिक्रिया

            ऐस्टरीकरण (estrification) कहलाती है।

                        कार्बोक्सिलिक अम्ल + ऐल्कोहॉल → एस्टर + जल

कुछ प्राकृतिक अम्ल अर्थात् कार्बनिक अम्ल तथा इनके स्रोत

(Some Naturally occurring Acids and their Sources)

अम्ल

स्त्रोत

अम्ल

स्त्रोत

बेन्जोइक अम्ल

ग्लूटॉमिक अम्ल

टार्टरिक अम्ल

ऑक्सेलिक अम्ल

सिट्रिक अम्ल

घास, पत्तियाँ तथा मूत्र

इमली, अंगूर, कच्चा आम

टमाटर, पालक, सॉरेलट्री

सन्तरा, नींबू

फॉर्मिक अम्ल

ऐसीटिक अम्ल

मैलिक अम्ल

लैक्टिक अम्ल

एस्कॉर्बिक अम्ल

(विटामिन C)

लाल चींटी, नेटल

सिरका

चाय

दही, खट्टा दूध

आँवला

 

 

            अम्लों के उपयोग (Uses of Acids)

अम्ल

अणुसूत्र

उपयोग

विशेष

एसीटिक एसिड

CH3COOH

सिरका निर्माण में, एसिटोन बनाने में तथा विलायक के रूप में

इसे सिरके का अम्ल भी कहा जाता है

बेन्जॉइक अम्ल

C6H5COOH

चटनी व अचार आदि डिब्बेबंद खाद्य सामग्री के परिक्षण में

 

सिट्रिक एसिड

C6H8O7

खाद्य पदार्थों तथा कपड़ा उद्योग में

नीबू में सिट्रिक अम्ल उपस्थित होता है। इसकी मात्रा सर्वाधिक संतरे में पाई जाती है तथा सब्जियों में इनकी सर्वाधिक मात्रा मिर्च में उपस्थित होती है।

फॉमिक अम्ल

HCOOH

फलों के संरक्षण में, रबड़ के स्कंदन में, तथा जीवाणु नाशक में

लाल चिंटियों के डंक में फॉमिक अम्ल उपस्थित होता है।

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल

HCL

PVC, एक्वारेजिया, सौंदर्य प्रसाधन में तथा प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में

यह एक प्रबल अम्ल है।

नाइट्रिक अम्ल

HNO3

एक्वारेजिया में, उर्वरकों, विस्फोटकों, स्टेनलेस स्टील के अम्लोपचार में

इसे शोरे का अम्ल भी कहा जाता है।

सल्फ्युरिक अम्ल

H2SO4

इसका उपयोग नाइट्रोसेलुलोस के उत्पादन में, अपमार्जक उद्योग में, संचायक बैटरियों में तथा पेट्रोलियम के शोधन में किया जाता है।

इसे ऑयल ऑफ विट्रॉल भी कहा जाता है।

ऑक्सेलिक अम्ल

H2C2O4

इसका उपयोग फोटो ग्राफी में तथा चमड़े के विरंजन में किया जाता है।

 

 

 

 

            क्षारक (Bases)

            वे पदार्थ जो स्वाद में कड़वे  तथा स्पर्श में साबुन जैसे चिकने होते हैं, क्षारक कहलाते हैं।

NaOH, KOH तथा MgOH2 आदि क्षार के उदाहरण हैं।

 

            क्षारकों के प्रकार (Types of Bases)

           

क्षार

अणुसूत्र

कार्य

विशेष

मैग्नीशियम हाइड्रोक्साइड

MgOH2

ये पेट की अम्लीयता को दूर करने में सहायक हैं अर्थात ये एंटाएसिड के रूप में कार्य करता है।

इसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया भी कहते हैं।

सोडीयम हाइड्रोक्साइड

NaOH

साबुन तथा अपमार्जक के निमार्ण में, टैक्सटाइल उद्योग में तथा पैट्रोलियम के शोधन में उपयोगी

इसे कॉस्टिक सोडा भी कहते हैं।

पोटेशियम हाइड्रोक्साइड

KOH

शैम्पु तथा शेविंग क्रीम के निर्माण में तथा प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में उपयोगी

इसमें SO2 तथा CO2 को अवशोषित करने की क्षमता होती है।

कैल्शियम ऑक्साइड

CaO

इसका उपयोग अग्निसह ईंटों के निर्माण में तथा बायलरों के प्रयोग में किया जाता है।

इसका उपयोग चिकित्सकीय रोकथाम में किया जाता है

 

            आयनीकरण की मात्रा के आधार पर

            (i) प्रबल क्षारक (Strong Bases) ये अपने जलीय विलयन में पूर्णतया आयनित हो जाते हैं। उदाहरण सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH), बेरियम हाइड्रॉक्साइड (Ba(OH)2), आदि।  

            सामान्यता क्षार धातुओं और क्षारीय मृदा धातुओं के ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षारक है। 

            (ii) दुर्बल क्षारक (Weak Bases) ये अपने जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होते हैं अतः इनके जलीय विलयन में अणु तथा आयन दोनों होते हैं। उदाहरण अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH4OH), आयरन हाइड्रॉक्साइड (Fe(OH)2), मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Mg(OH)2), आदि।

 

            क्षारकों के गुणधर्म (Properties of Bases)

(i)       क्षारक धातु से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस के उत्सर्जन के साथ लवण का निर्माण करते हैं।

            (2NaOH        +          Zn       "        Na2ZnO2 +H2#

            सोडियम हाइड्रॉक्साइड                          सोडियम जिंकेट

            यद्यपि सभी क्षार धातुओं के साथ इस प्रकार की अभिक्रियाएँ नहीं देते हैं।

(ii)      क्षारकों की अम्लों के साथ अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है। जिसके फलस्वरूप संगत लवण             तथा जल बनते हैं।

(iii)     क्षारक अधात्विक ऑक्साइडों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं।

            क्षारक + अधात्विक ऑक्साइड" लवण + जल

            क्योंकि यह अभिक्रिया अम्ल और क्षारक के मध्य अभिक्रिया जैसी है अतः हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि अधात्विक ऑक्साइडों की प्रकृति अम्लीय होती है।

(iv)     क्षारक जल में घोले जाने पर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) उत्पन्न करते हैं।

            उदाहरण          

                                    सोडियम हाइड्रॉक्साइड

            सभी क्षारक जल में घुलनशील नहीं होते हैं। जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं। उदाहरण NaOH, KOH, Ca(OH)2, NH4OH, आदि। अतः सभी क्षार क्षारक हैं लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते हैं।

(v)      तेल और गंधक क्षार में घुल जाते हैं। क्षार जैसे जिंक, ऐलुमिनियम, टिन, आदि के ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड अम्ल के साथ-साथ गर्म सान्द्र NaOH और KOH के विलयनों में भी घुल जाते हैं। अतः ये उभयधर्मी (amphoteric) कहलाते हैं।

(vi)     प्रबल क्षार जैसे NaOH, KOH आदि अपने जलीय विलयन तथा गलित अवस्था में विद्युत के अच्छे चालक हैं क्योंकि इन अवस्थाओं में ये शीघ्रता से आयन उपलब्ध कराते हैं।

 

            क्षारकों के उपयोग (Uses of Bases)

(i)       कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (Calcium Hydroxide) [Ca(OH)2] इसका उपयोग विरंजक पाउडर के निर्माण में, कंकरीट और प्लास्टर में, चूना पोतने में, जल  के मृदुकरण में और अम्लीय मृदा को उपचारित करने में किया जाता है। इसकी सहायता से चमड़े की बाहरी सतह पर स्थित बालों को भी हटाया जा सकता है।

(ii)      मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Magnesium Hydroxide) [Mg(OH)2] इसका उपयोग प्रतिअम्ल के रूप में और चीनी उद्योग में किया जाता है।

(iii)     सोडियम हाइड्रॉक्साइड (Sodium hydroxide) (NaOH) इसे कॉस्टिक सोड़ा भी कहते हैं। उपयोग धातुओं से ग्रीस हटाने में, कागज बनाने में, कठोर साबुन तथा अपमार्जक के निर्माण में तथा टैक्सटाइल उद्योग में किया जाता है। इसके अलावा इसका प्रयोग पेट्रोलियम के शोधन में तथा घरों की सफाई में किया जाता है।

(iv)     पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (Potassium Hydroxide) (KOH) इसका उपयोग प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप बुलबुलों में मृदु साबुन, शैम्पू तथा शेविंग क्रीम के निर्माण में किया जाता है। इसमें CO2 तथा SO2 को अवशोषित करने की क्षमता होती है।

           

(v)      कैल्सियम ऑक्साइड (Calcium Oxide (CaO) इसका उपयोग शुष्क कारक के रूप में विरंजक चूर्ण के निर्माण में, गारे में एक अवमय के रूप में किया जाता है।

(vi)     मैग्नीशियम ऑक्साइड (Magnesium Oxide) (MgO) इसका उपयोग भट्‌टी में अग्निसह ईटों के निर्माण में रबड़ के रूप में तथा बायलरों के प्रयोग में किया जाता है।

 

            लवण (Salts)

            अम्लो और क्षारकों की अभिक्रिया से प्राप्त यौगिकों को लवण कहते हैं तथा ऐसी अभिक्रियाएँ उदासीनीकरण अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। दूसरे शब्दों में, इन्हें किसी अम्ल के विस्थापनशील H को क्षार द्वारा विस्थापित करता किया जाता है। लवण का धनायन क्षार से तथा लवण का ऋणायन अम्ल से आता है।

            NaOH+ HCI " NaCl+ H2O

                                      लवण

            लवणों के प्रकार (Types of Salts)

            विभिन्न प्रकार के लवण निम्न प्रकार हैं –

(i)        सामान्य लवण

            उदाहरण NaCl, Na2SO4, KNO3, FeSO4, K2SO4 (Ca3) (PO4)2] Na3 BO3, आदि।

 (ii)      अम्लीय लवण

उदाहरण NaHCO3, NaHSO4,          NaH2PO4 आदि।

(iii)      क्षारीय लवण

उदाहरण Mg(OH)Cl,  Zn(OH)Cl, आदि।

–           यदि एक सामान्य लवण दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षारक से प्राप्त किया जाता है तो यह लवण क्षारीय कहलाता है। क्योंकि इसका जलीय विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है।

            उदाहरण Na2CO3, CH3COONa, Na2B4O7 . 10H2O, आदि।

–           यदि एक सामान्य लवण प्रबल अम्ल तथा दुर्बल क्षारक की अभिक्रिया से प्राप्त होता है तो प्राप्त लवण अम्लीय होता है क्योंकि इसका जलीय विलयन नीले लिटमस को लाल कर देता है।

–           यदि एक सामान्य लवण प्रबल अम्ल तथा दुर्बल क्षारक की अभिक्रिया से प्राप्त किया जाता है तो प्राप्त लवण उदासिन लवण कहलाता है क्योंकि इसके जलीय विलयन का लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

            उदाहरण NaCl, K2SO4, NaNO3, KCIO3, आदि।

 

            उदाहरण FeCl3, CuSO4 , ZnCl2 , FeSO4 , HgSO4 आदि।

(iv)      द्विक लवण

उदाहरण मोहर लवण [FeSO4. (NH4)2 SO4. 6H2O], पोटाश एलम [K2SO4. A12(SO4)3 . 24H2O], आदि। ये लवण सूत्र में उपस्थित सभी आयनों (अवयवों) का परीक्षण देते हैं।

कुछ सामान्य लवणों के उपयोग (Uses of Some Common Salts)

           

लवण

अणुसूत्र

उपयोग

विशेष

सोडियम क्लोराइड

NaCl

विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निमार्ण में प्रयुक्त होने वाला कच्चा पदार्थ है

क्रिस्टल अशुद्धियों की उपस्थिति के कारण ये प्राकृतिक रूप से भूरे रंग का दिखाई देता है। इसे चट्‌टानी नमक भी कहते हैं।

सोडियम कार्बोनेट

Na2CO3. 10H2O

कांच, साबुन एवं कागज उद्योग में, जल की स्थायी कठोरता हटाने में, अपमार्जकों के निर्माण में, कपड़ों की शुष्क धुलाई (drycleaning)

इसे धावन का सोडा (Washing Soda) भी कहते है।

 

सोडियम बाईकार्बोनेट

NaHCO3

बेकिंग पाउडर बनाने में, सोडा अम्ल अग्निशामक में, प्रतिअम्ल के रूप में

इसे बेकिंग सोडा भी कहते है।

जिप्सम

CaSO4. 24H2O

टूटी हड‌्डीयों को जोडने व प्लास्टर के रूप में, खिलोने बनाने, दीवारों को चिकना बनाने में

आंशिक रूप से इसमें से क्रिस्टलन जल को हटाकर प्लास्टर ऑफ पेरिस प्राप्त किया जाता है।

कॉपर सल्फेट

CuSO4. 5H2O

विद्युत लोपन में, कॉपर को शुद्ध करने में रंगाई छपाई में तथा कीटाणुनाशी के रूप में

इसे नीला थोथा भी कहते हैं।

पोटाश एलम

K2SO4. Al2(SO4)3 . 24H2O

जल को शुद्ध करने में, खून बहने से रोकने में, रंगाई में रंग बन्धक के रूप में, चमड़ा उद्योग में तथा औषधि निर्माण में

इसे सामान्य भाषा में फिटकरी भी कहते है।

पोटेशियम नाइट्रेट

KNO3

उर्वरक के रूप में, काँच उद्योग में, पाउडर तथा आतिश बनाने में

इसे सॉल्ट पीटर भी कहा जाता है।

 

            pH स्केल (pH Scale)

            pH मूल्य किसी पदार्थ की अम्लीयता और क्षारीयता की माप है। pH स्केल वह स्केल है, जो किसी विलयन में  उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

                         

            क्योंकि H+ सामान्य H3O+ (हाइड्रोनियम आयन) के रूप में रहता है।

            उदासीन विलयन का pH = 7

            अम्लीय विलयन का pH <7

            क्षारीय विलयन का pH > 7

            अम्ल तथा क्षारक की शक्ति विलयन (जल) में क्रमशः H+ आयन तथा OH आयन की संख्या पर निर्भर करती है। अधिक संख्या में H+ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं जबकि कम H+ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलाते हैं।

 

            कुछ सामान्य पदार्थोँ के pH मान  (pH of Some Common Substances)

 

उदासीन

क्षारीय

अम्लीय

 

pH 0-1

pH 1.2-2

pH 2.2-3.4

pH 3.2-3.9

pH 4.0-4.4

pH 4.5-5.5

pH 6.4-6.6

pH 7

pH 7.3-7.5

pH 8

pH 9.2

pH 10

pH 11

pH 12.5

pH 14

बैटरी अम्ल

जठर अग्ल

नीम्बू का रस, सिरका

सन्तरे का रस, सोडा, कुछ दोनों को साफ करने वाले विलयन, वाइन

टमाटर का रस, बियर

काली कॉफी

लार, गाय का दूध

शुद्ध जल

मानव मूत्र, मानव रक्त

समुद्री जल, pH उदासीन करने वाले दन्त विलयन

बेकिंग सोडा, सोडा पेय

प्रतिअम्ल, दाँतों के उपचार में प्रयुक्त विलयन

साबुन वाला पानी

सोडियम हाइड्रॉक्साइड

 

 

            दैनिक जीवन में pH का महत्व

1.        पौधें और पशु pH के प्रति संवेदनशील होते हैं। हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है। जावित प्राणी केवल सकीर्ण pH परास (परिसर) में ही जीवित रह सकते हैं। जब नदी के जल का pH अम्लीय वर्षा का कारण परिवर्तित हो जाता है तो ऐसी नदी में जलीय जीवधारियों की उत्तरजीविता कठिन हो जाती है। अच्छी उपज के लिए (पौधों को अच्छी वृद्धि के लिए) पौधों को विशिष्ट pH परास की आवश्यकता होती है।

2.         उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा अम्लीय हो जाती है, जो पौधों की वृद्धि के लिए अच्छा नहीं है। अतः मृदा को पौधों की वृद्धि के अनुरूप बनाने के लिए इसमें उचित मात्रा में (मृदा के परीक्षण के उपरान्त) कुछ क्षारक जैसे क्विक लाइम (चूना, कैल्सियम ऑक्साइड) अथवा बुझा चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) मिला दिये जाते हैं, जो मृदा में उपस्थित अम्ल को उदासीन कर देते हैं। यदि मृदा अधिक क्षारीय हो जाती है, तो इसमें कार्बनिक पदार्थ, जो अम्ल मुक्त करते हैं. मिला दिए जाते हैं।

3.        कारखानों से निकलने वाले वाहित जल में अनेकों अम्ल होते हैं, जो नदी या झील में मिलकर इसे प्रदूषित करते हैं। अतः इसमें उपस्थित अम्ल को उदासीन करने के लिए इसमें कुछ क्षारीय पदार्थ मिला दिए जाते हैं।

4.        हमारा उदर भोजन के पाचन के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न करता है। अपच की स्थिति में उदर द्वारा अत्यधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न करने से जलन व दर्द का अनुभव होता है, जिससे मुक्त होने के लिए क्षारक, जी प्रतिअम्ल कहलाते हैं जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (दुर्बल क्षारक), का उपयोग किया जाता है। ये प्रतिअम्ल आधिका (आवश्यकता से अधिक) अम्ल को उदासीन कर देते हैं।

5.        मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय आरम्भ हो जाता है। मुँह में अवशिष्ट शर्करा एवं खाद्य पदाची का बैक्टीरिया द्वारा निम्नीकरण करने से अम्ल उत्पन्न होता है। अम्ल दाँतों के इनैमल, जो कैल्सियम फॉस्फेट से बना होता है, को संक्षारित करता है। दन्त मंजन सामान्यतः क्षारीय होते हैं इनके उपयोग द्वारा अम्ल की आधिक्य मात्रा की उदासीन करके दन्त क्षय रोका जा सकता है।

6.        मधुमक्खी के डंक मारने पर या चींटी के काटने पर अम्ल (फॉमिक अम्ल) के शरीर के छोड़ने के कारण दर्द व जलन का अनुभव होता है। प्रभावित अंग में बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) या कैलेमाइन (जिंक कार्बोनेट) जैसे दुर्बल क्षारक रगड़ने से आराम मिलता है। 

            सुचक (Indicators)

            सूचक रंग में परिवर्तन के द्वारा विलयन के pH में परिवर्तन को दर्शातें हैं। अतः सूचकों का प्रयोग किसी विलयन की प्रकृति अम्लीय, क्षारीय अथवा उदासीन है ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

            अम्ल-क्षार सूचक (Acid-Base Indicators)

            ये दुर्बल कार्बनिक अम्ल या फिर दुर्बल कार्बनिक क्षारक होते हैं। उदाहरण फीनॉल्फ्थैलीन एक दुर्बल कार्बनिक अम्ल है तथा मेथिल ऑरेंज एक दुर्बल कार्बनिक क्षारक है।

विभिन्न माध्यमों में सूचकों के रंग

सूचक

pH परास

क्षारीय माध्यम में रंग

अम्लीय माध्यम में रंग

लिटमस

5.5-7.5

नीला

लाल

मेथिल ऑरेंज

3.1-4.5

पीला

लाल

फीनॉल्पथैलीन

8.0-9.8

गुलाबी

रंगहीन

 

 

 

 

 

            बफर विलयन (Buffer Solution)

–           ऐसे विलयन, जिनका pH तनु करने अथवा अम्ल या क्षारक की थोडी-सी मात्रा मिलाने के बाद भी अपरिवर्तित रहती है, 'बफर-विलयन' कहलाते हैं।

            बफर विलयन के प्रकार (Types of Buffer Solutions)

            ये दो प्रकार के होते हैं –             

(i)       अम्लीय बफर ऐसीटिक अम्ल व सोडियम ऐसीटेट का मिश्रण, हाइड्रोजन सायनाइड। व पोटैशियम सायनाइड का मिश्रण तथा बोरिक अम्ल और बोरेक्स का मिश्रण अम्लीय बफर के उदाहरण है।

 (ii)      क्षारीय बफर किसी दुर्बल क्षारक तथा इसके प्रबल अम्ल के साथ लवण का समान मात्रा में मिश्रण क्षारीय बफर कहलाता है। अमोनियम हाड्रॉक्साइड तथा अमोनियम नाइट्रेट का मिश्रण भी क्षारीय बफर का उदाहरण है।

            लवणों का जल-अपघटन (Hydrolysis of Salts)

            निश्चित अनुपात में अम्लों और क्षारकों के बीच अभिक्रिया से लवण प्राप्त होते है। जब प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार से बने लवण को जल में घोला जाता है तो विलयन में यह पूर्णतया आयनित हो जाता है लेकिन यह जल से क्रिया नहीं करता है।

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