भौतिक और रासायनिक परिवर्तन

                                                                                                                भौतिक और रासायनिक परिवर्तन
1. भौतिक परिवर्तन :

– भौतिक परिवर्तन में, पदार्थ के भौतिक गुणों जैसे आकार, आमाप अर्थात् साइज, रंग और अवस्था में परिवर्तन हो जाता है। सामान्यत: यह उत्क्रमणीय है अर्थात् अभिक्रिया की दशाओं को बदलकर पुन: मूल पदार्थ प्राप्त किया जा सकता है।  

– इस प्रकार के पदार्थ में कोई नया पदार्थ नहीं बनता है, पदार्थ का एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन होता है। जैसे- जल का वाष्पीकरण, बर्फ का पिघलना।

– अन्य उदाहरण :

 – बादलों का बनना।

 – स्प्रिंग को खींचना, पदार्थों का चुंबकीय होना।

 – जल से बर्फ बनना।

 – तौलिये के द्वारा पानी को सोख लेना।

 – कागज के टुकड़े को फाड़ना।

 – तांबा को खींचकर उससे पतले तार निकालना।

 – नौसादर का उर्ध्वपातन।

 – शक्कर का पानी में विलय।

2. रासायनिक परिवर्तन :

– वह परिवर्तन जिसमें एक या एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं अर्थात् मूल पदार्थ का आन्तरिक आण्विक संघटन विकृत हो जाता है, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।

– मैग्नीशियम रिबन, कोयला, लकड़ी व पत्तियों का जलना रासायनिक परिवर्तन हैं।

– रासायनिक परिवर्तन सामान्यतया अनुत्क्रमणीय होते हैं।

 उदाहरण :

 – फलों का पकना

 – लोहे में जंग लगना

 – दही का जमना

 – सूर्य से प्रकाश

 – दूध से दही का बनना, दही का फटना

 – धातुओं का संक्षारण

 – कटे हुए सेव का भूरा होना

 – श्वसन क्रिया

 – पदार्थों का दहन

 – किण्वन/Fermentation

 – पौधों में प्रकाश संश्लेषण का होना (CO2 तथा H2O का ग्लूकोज में परिवर्तन)

– कोयले को जलाने पर कार्बन डाई ऑक्साइड गैस बनती है।

C       +   O2 → CO2
(ठोस)    (गैस)     (गैस)

– मोमबत्ती का जलना भौतिक और रासायनिक दोनों परिवर्तनों का उदाहरण है।

– जुगनू (Firefly) में प्रकाश उत्सर्जित करने के लिए विशेष अंग होते हैं। प्रकाश उत्पन्न करने की इस प्रक्रिया को bioluminescence कहते हैं।

– रासायनिक अभिक्रिया :

 जब किसी पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन होते हैं, तो उसमें रासायनिक अभिक्रिया होती है। जिसमें पदार्थ के रासायनिक गुण मूल पदार्थ से अलग हो जाते हैं लेकिन कुल द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

– रासायनिक अभिक्रिया को रासायनिक समीकरण के द्वारा व्यक्त किया जाता है। जिस पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन होता है, उसे अभिकारक या क्रिया कारक तथा बनने वाले पदार्थ को क्रियाफल कहते हैं।   

– ऑक्सीजन एवं अपचयन अभिक्रियाएँ:-

1. ऑक्सीकरण : 

 वे अभिक्रियाएँ जिनमें पदार्थ ऑक्सीजन/विद्युत ऋणी तत्त्वों से संयोग करता है, ऑक्सीकरण कहलाती है।

C + O2 → CO2

 – अभिक्रिया में पदार्थ हाइड्रोजन/विद्युत धनी तत्त्वों का त्याग करता है।

HCl+ MnO2 → MnCl2 + H2O+ Cl2

2. अपचयन :

 यह अभिक्रिया ऑक्सीकरण से विपरित है इसमें हाइड्रोजन या विद्युत धनी तत्त्व का संयोग होता है

Cl2+H2 → 2HCl2

इसमें ऑक्सीजन या विद्युत ऋणी तत्त्वों का निष्कासन होता है।

ZnO+C→ Zn+CO

3. रेडॉक्स अभिक्रिया :

 ऐसी अभिक्रिया जिनमें ऑक्सीकरण एवं अपचयन दोनों साथ-साथ हो, रेडॉक्स या ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया कहलाती है।

CuO+H2→ Cu+H2O

– उत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ :-

 वे अभिक्रियाएँ जिनमें क्रियात्मक क्रिया करके क्रियाफल बनाते है।

  \( A+B \rightleftarrows C+D \\ N_{2}+3 H_{2} \rightleftarrows 2 N H_{3} \)

– अनुत्क्रमणीय :-

 वे अभिक्रियायें जिनमें क्रियाकारक क्रिया करके क्रियाफल तो बना लेते है लेकिन क्रियाफल पुन: क्रिया करके उत्पाद नहीं बनाते।

 \( A+B \longrightarrow C+D \\ 2 K+C l O_{3} \longrightarrow 2 K C l+3 O_{2} \)

– द्विविस्थापन अभिक्रिया :- द्विविस्थापन अभिक्रिया में दोनों अभिकारकों के परमाणु या परमाणु समूह आपस में विस्थापित हो जाते है।

 \(\mathrm{CuSO}_{4}+2 \mathrm{NaOH} \longrightarrow \mathrm{Cu}(\mathrm{OH})_{2}+\mathrm{Na}_{2} \mathrm{SO}_{4}\)
\( A \,\,B+C \,\,D \longrightarrow A\,\, D+C\,\, B \\ \circ \,\,\, \odot\,\,\,\,\, \times \oplus \quad \,\,\,\,\,\,\,\, \circ\,\, \oplus \quad \times \odot \)

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